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तीसरा फ्यूल जिल्ट कॉन्फ्रेंस और मोज़िला हैकाथन चेन्नई में संपन्न

by Prasad Krishna last modified Dec 15, 2015 07:51 AM
तीसरा फ्यूल जिल्ट कॉन्फ्रेंस 2015 आज चेन्नई में संपन्न हुआ. भाषाई कंप्यूटिंग के लिए मानक भाषाई संसाधन और औज़ार बनाने में पिछले सात सालों से जुटी फ्यूल परियोजना के द्वारा 2013 में आरंभ किए गए इस सम्मेलन के प्रायोजक और आयोजक दुनिया की जानी-मानी कंपनियां मोज़िला, सी-डैक और रेड हैट हैं.

तीन दिवसीय यह सम्मेलन 20 नवंबर को चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय के टैग ऑडिटोरियम में आरंभ हुआ. इसके उद्घाटन सत्र को मोज़िला के लोकलाइजेशन ड्राइवर एक्सेल हेच्ट, आईआईटी मद्रास की प्रोफ़ेसर हेमा मूर्ति, आईआईटी मद्रास के ही हेमचंद्रण कराह और सीडैक के सहायक निदेशक जसजीत सिंह ने संबोधित किया. पहले दिन के शाम के पैनल डिसक्शन में मोज़िला की पेइंग मो और आर्की तथा अवाया के जी. करूणाकर और फ्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक राजेश रंजन के मॉडरेशन में खुली परिचर्चा हुई. पहले दिन के कार्यक्रम में भाषाई कंप्यूटिंग पर काम करने वाले कई जाने-माने विद्वानों ने हिस्सा लिया.

तमिलनाडु के स्थानीय भाषाई तकनीक विशेषज्ञों के अलावा इस सम्मेलन में भारत और नेपाल के विभिन्न भाषा-भाषाई करीब पचास से अधिक लोग उपस्थित हुए. तीन दिवसीय इस सम्मेलन का पहला दिन सभी लोगों के लिए खुला था जबकि अगला दो दिन मोज़िला लोकलाइजेशन हैकाथन का कार्यक्रम चला जिसके लिए सहभागी ख़ास तौर पर आमंत्रित किए गए थे.

लोकलाइजेशन स्रोत भाषा से स्थानीय भाषा में किसी उत्पाद को बदलने की पूरी तकनीकी प्रक्रिया को कहा जाता है.  इसके अंतर्गत मोज़िला के विभिन्न उत्पादों के लोकलाइजेशन यानी स्थानीयकरण की प्रक्रिया, उसमें सुधार और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई.  पूरे कार्यक्रम का संचालन सी-डैक के तकनीकी अधिकारी चंद्रकांत धूताडमल ने किया.

उद्घाटन सत्र का आरंभ करते हुए फ़्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक राजेश रंजन ने फ़्यूल प्रोजेक्ट के बारे में उपस्थित श्रोताओं को बताया. उन्होंने बताया कि महज सामुदायिक योगदान और कुछ संगठनों की मदद के बदौलत भाषाई संसाधन का यह प्रोजेक्ट दुनिया की भाषाई संसाधन जैसे तकनीकी शब्दावली, स्टाइल गाइड आदि की सबसे बड़ी खुली परियोजना बन गई है. मानक तकनीकी शब्दावली, स्टाइल गाइड, ट्रांसलेशन एसेसमेंट मैट्रिक्स सहित कई महत्वपूर्ण संसाधनों से लैस यह प्रोजेक्ट विश्वव्यापी भाषाई संदर्भ का बड़ा अभिलेख बन गया है.

गौरतलब है कि दुनिया की क़रीब 60 भाषाओं के भाषा समुदाय अभी इस परिजोयना से जुड़ी हुई है. मोज़िला के एक्सेल हेच्ट ने भारत में बढ़ रहे इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि मोज़िला और इसके खुले मूल्यों की उपस्थिति कितनी इनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है. हेमा मूर्ति ने कहा कि अभी भी भाषाई कंप्यूटिंग की स्थिति काफी अच्छी नहीं हुई है और इस क्षेत्र में काफी काम होना बाकी हैं. जसजीत सिंह ने कहा कि कुछ और बड़ी कंपनियों के साथ फ़्यूल का जुड़ाव होना जरूरी है और उन कंपनियों को सामुदायिक रूप से तैयार किए गए संसाधन के महत्व को समझना चाहिए. ‘समानता के चिह्न और डिजिटल मानविकी का विकास’ विषय पर हेमचंद्रण का वक्तव्य बेहद उम्दा रहा. उन्होंने कहा कि डिजिटल मानविकी ने पारंपरिक मानविकी को हैक कर लिया है. उन्होंने कहा कि हमें महज इंटरफेस स्तरीय लोकलाइजेशन से ऊपर उठना चाहिए.  

कार्यक्रम में लिब्रेऑफिस के इटालो विग्नोली, हमारा लिनक्स के विकास तारा, इतिहासकार रविकांत और जाने-माने ब्लॉगर रवि रतलामी ने भी अपना वक्तव्य दिया. भाषाई तकनीक विशेषज्ञ बिराज कर्माकर, प्रवीण ए, शुभाशीष पाणिग्रही, वीथिका मिश्रा, प्रवीण सतपुते, चंदन कुमार, राजू विंदाने सहित कई लोगों ने अपना वक्तव्य दिया. मोज़िला के एक्सेल हेच्ट, पेइंग मो और आर्की के दिशा-निर्देश में अंतिम दो दिन विभिन्न भाषाओं में काम करने वाले लोगों ने व्यापक परिचर्चा के दौरान कई विषयों पर बातें की और उपस्थित लोगों ने मोज़िला की स्वयंसेवी गतिविधियों के भविष्य की कार्ययोजना बनाई.


Read the original published by Aaj Tak on November 24, 2015.

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